भारत देश गरीब नहीं है जी,भारत देश कल भी अमीर था आज भी अमीर है, देश में ज्यादातर लोग हरामखोर, मुफ्तखोर और निकम्मे हो गए हैं, देश की आबादी लगभग 150 करोड़ के आसपास है इसमें से 145 करोड़ लोग चाहते हैं कि मेहनत न करनी पड़े ,बिना कोई काम किये सरकार उनका पूरा ध्यान रखे तो ऐसा राष्ट्र जहा 90 परसेंट लोग निकम्मे हो गए हों वो कैसे अमीर होगा, और ऐसे निकम्मे लोगों की गरीबी कौन दूर कर सकता है, सुनो देशवासियों टेक्स कोई नहीं देना चाहता सुविधा चाहिए विकसित देशों जैसी,मुफ्तखोरी इस कदर छाई हुई है कि मेहनत करके कोई नहीं खाना चाहता, बच्चा पैदा हो तो सरकार पैसे देती है, उसको पालने के लिए राशन आंगनबाड़ी के द्वारा देती है, फिर पढ़ाई फ्री करबाती है, इसके बाद बेरोजगारी भत्ता देती है, फिर शादी के लिए पैसा सरकार देती है, मकान के लिए सरकार पैसा देती है, स्कूलों में बच्चों को खाना सरकार देती है, तो अगर सब कुछ सरकार फ्री देती है तो राष्ट्र के नागरिक निकम्मे क्यों नहीं बनेंगे, खेती के लिए 6000 रुपये साल के सरकार देती है, चाहे कोई खेती करे या न करे, सरकारें मुफ्त राशन देती हैं, मुफ्त बिजली, पानी देती हैं तो ऐसे राष्ट्र के नागरिक जिनको सब फ्री मिले तो वो राष्ट्र गरीब कैसे और बहां कैसी गरीबी, बाकी जिनको लूट खसूट का मौका मिले वो अपनी तरफ से कोई कमी नहीं छोड़ते, मनरेगा में 15 लेबर एक मस्ट्रोल पर काम करते हैं शाम को सरकार उनको 3000 रुपये देती है और वे 15 लोग दो बोरी सीमेंट की डालकर पूरा दिन बिश्राम करके बेशर्मों की तरह घर चले जाते हैं और जिसने इस पर आपत्ति जताई वो गलत इंसान बन जाता है तो ऐसा राष्ट्र प्रगति कैसे करेगा क्योंकि सारा पैसा तो मुफ्तखोरी और हरामखोरी में जा रहा है, मसला है वोट बैंक का, न देश से मतलब न देश के तानेबाने से मतलब, देश जाए भाड़ मैं जनता को सिर्फ मुफ्तखोरी से मतलब और नेताओं को और कर्मचारियों अधिकारियों को लूटपाट से मतलब, तो ऐसा राष्ट्र जहां बच्चे के पैदा होने से लेकर मरने तक मुफ्तखोरी छायी रहती है ऐसे राष्ट्र का क्या हो सकता है, जहां नेता, अभिनेता, मंत्री संतरी, कर्मचारी अधिकारी, जनता चाहे शहरी क्षेत्र की हो या ग्रामीण क्षेत्र की सब संघठित गिरोह की तरह लूटपाट कर रहे हों जिनको सिर्फ अपनेआप से मतलब हो राष्ट्र देश से उनको कोई लेनादेना नहीं, और इतनी लूट के बाबजूद देश के लोगों मैं आक्रोश न हो तो ऐसे राष्ट्र का भगवान हीं मालिक है, नेता क्या करें उनको सरकार बनानी है लूटपाट करनी है और जनता को मुफ्त चाहिए उनको मुफ्तखोरी पसंद है तो ऐसे में राष्ट्र का क्या हो सकता है कब तक मुफ्तखोरी, हरामखोरी, निकम्मापन चलता रहेगा, कब तक बोट बैंक की राजनीति चलती रहेगी, कोई भी देश तब तक तरक्की नहीं कर सकता जब तक बहां की जनता पढ़ी लिखी, समझदार नहीं होगी, आप अनुमान लगाएं देश की जनता लगभग 150 करोड़ टैक्स देने बाले 5 करोड़ तो देश अमीर कैसे और जब सब कुछ मुफ्त में बांटा जा रहा तो देश गरीब कैसे, सवाल कई हैं जवाब कोई नहीं देने बाला, तो कुल मिलाकर बात यह है जब तक देशभक्ति, देशप्रेम, नहीं सिखाया जाएगा, मुफ्तखोरी बन्द नहीं कि जाएगी, लोगों को कामकाज की आदत नहीं डाली जाएगी, तब तक सुधार असम्भब है, देश के लोगों को अच्छी शिक्षा, और स्वास्थ्य ब्यबस्था फ्री होनी चाहिये बस बाकी सब मुफ्तखोरी, हरामखोरी बन्द करनी चाहिए तभी राष्ट्र में बदलाव नजर आएगा नहीं तो आने वाले समय में ऐसी अराजकता फैलेगी कि दिनदहाड़े लूटपाट, हत्या, डकैती जैसे अपराध होंगे और कोई कुछ नहीं कर पायेगा ।