भारत ने पहली बार आधिकारिक तौर पर अफगानीस्तान के मुद्दे पर बयान देते हुए कहा है कि वह अफगान में तालिबान सरकार को मान्यता नहीं देगी !! यदि भारत तालिबानी सरकार को मान्यता दे देती तो, यह तालिबान के लिए एक बड़ी सेट बेक होती, ओर तालिबान के लिए विश्व का दरवाजा अपने आप खुल जाता !! क्यूं की भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्रीक देश है, Defense में दुनिया का चौथा बड़ा पावर है, ओर दुनिया की पांचवीं बड़ी आर्थिक पावर है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने साफ कर दिया कि वो तालिबान की नई सरकार को एक "Dispensation" से ज्यादा ओर कुछ नहीं मानते !! मोदी सरकार के इस फैसले से भारत में रह रहे लिब्रांडूओ में मिर्ची का जबर्दस्त लहर उठने वाली है, और अब आप लोग भारत में ज्वलनशील पत्रकारिता के एक से बढ़कर एक नमूने देख सकेंगे.
अफगानिस्तान के मामले में भारत बहुत ही कूटनीतिक तरीके से काम ले रहा है. अमेरिका की गोलमोल नीति से उलट, ब्रिटेन, रूस, डेनमार्क, स्विजरलैंड, ईरान, ताजिकिस्तान, पूरे यूरोपीय यूनियन, ऑस्ट्रेलिया, जापान आदि देशों ने तालिबानी सरकार को मान्यता देने से इंकार करने के बाद यह भारत का तालिबान के सम्बंध में पहला बयान है !! आतंकवादियों के सरकार को मान्यता देने का मतलब अपने लिए मुसीबत पैदा करना जैसा होगा भारत के लिए.
आने वाले दिनों में भारत और आक्रामक रुख अपना सकता है, यह साफ संकेत दे दिया है विदेश मंत्री जयशंकर जी ने...
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